रविवार, 25 सितंबर 2011

अभी वतन आजाद नही, आजाद हिंद तू फ़ौज बना!!

श्रम करके संध्या को घर में, अपने बिस्तर पर आया था
उस दिन ना जाने क्यों मैंने, मन में भारीपन पाया था

जब आँख लगी तो सपने में लहराता तिरंगा देखा था
राष्ट्र ध्वजा की गोद लिए, भारत माँ का बेटा था

जयहिंद का नारा बोल बोल के आकर वह चिल्लाये थे
उस रात स्वंय बाबू सुभाष, मेरे सपने में आये थे

बोले भारत भूमि में जन्मा है, तू कलंक क्यों लजाता है
राग द्वेष की बातो पर, क्यों अपनी कलम चलाता है

इन बातो पर तू कविता लिख, मै विषय तुम्हे बतलाता हूँ
वर्तमान के भारत की मै,झांकी तुझे दिखाता हूँ

हमने पूनम के चंदा को राहू को निगलते देखा है
हमने शीतल सरिता के पानी को उबलते देखा है

गद्दारों की लाशों को चन्दन से जलते देखा है
भारत माता के लालों को शोलो पर चलते देखा है

देश भक्त की बाहों में सर्पों को पलते देखा है
हमने गिरगिट सा इंसानों को रंग बदलते देखा है

जो कई महीनो से नही जला हमने वो चूल्हा देखा है
हमने गरीब की बेटी को फाँसी पर झूला देखा है

हमने दहेज़ बिन ब्याही बहुओ को रोते देखा है
मजबूर पिता को गर्दन बल पटरी पर सोते देखा है

देश द्रोही गद्दारों के चहरे पर लाली देखी है
हमने रक्षा के सौदों में होती हुई दलाली देखी है

खादी के कपड़ो के भीतर हमने दिल काला देखा है
इन सब नमक हरामो का,शेयर घोटाला देखा है

हमने तंदूर में नारी को रोटी सा सिकते देखा है
लाल किले के पिछवाड़े, अबला को बिकते देखा है

राष्ट्रता की प्रतिमाओ पर,लगा मकड़ी का जाला देखा है
जनपद वाली बस्ती में हमने कांड हवाला देखा है

आतंकवाद के कदमों को इस हद तक बढ़ते देखा है
अमरनाथ में शिव भक्तों को हमने मरते देखा है

होटल ताज के द्वारे, उस घटना को घटते देखा है
माँ गंगा की महाआरती में, बम फटते देखा है

हमने अफजल की फाँसी में संसद को सोते देखा है
जो संसद पर बलिदान हुए, उनका घर रोते देखा है

उन सात पदों के सूरज को भारत में ढलते देखा है
नक्शलवाद की ज्वाला में, मैंने देश को जलते देखा है

आजादी के दिन दिल्ली,बन गई दुल्हनिया देखी है
15 अगस्त के दिन भोलू की भूखी मुनिया देखी है

हमने संसद के अन्दर राष्ट्र की भ्रस्टाचारी देखी है
हमने देश के साथ स्वयं, होती गद्दारी देखी है

ये सारी बाते सपने में नेता जी कहते जाते थे
उनकी आँखों से झर झर आंसू भी बहते जाते थे

बोले जा बेटे भारत माता के, अब तू सोते लाल जगा
अभी वतन आजाद नही, आजाद हिंद तू फ़ौज बना

अच्छा लगा हो तो आगे फॉरवर्ड कीजिये, और भारतीय भाषाओं में अनुवादित कीजिये, अपने ब्लॉग पर डालिए, मेरा नाम हटाइए, अपना नाम /मोबाईल नंबर डालिए| मुझे कोई आपत्ति नहीं है| मतलब बस इतना है कि ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये| 

सोमवार, 19 सितंबर 2011

वतन खतरे में है


जागो जवानो वतन की आबरू खतरे में है

सो नहीं सकते अपना वतन खतरे में है


नौजवानों जाग जाओ बुलाता है वतन


देश की अपने अस्मत पड़ी खतरे में है


अब सुरक्षित न हिमालय न ही ब्रह्मपुत्र है


देख लो सीमायें सारी खड़ी खतरे में है

सो चुके हैं देश को रह देना जिनका काम

ठोंक कर ताल उठो, वतन खतरे में है



सबको जना इस माटी ने क़र्ज़ इसका है बहुत

लाज माँ की, शर्म बहनों की अब खतरे में है


बाँध कर राखी उठा लो तुम कसम अब दोस्तों


ये सदा "कादर" की है अब वतन खतरे में है


केदारनाथ "कादर"

बुधवार, 10 अगस्त 2011

आपका का सच्चा मित्र या महज़ एक छलावा?

आपका का सच्चा मित्र या महज़ एक छलावा?
               दोस्तों इस लिए कहता हूँ एक सच्च मित्र बनो !! 

http://rajpurohitagra.blogspot.com/
      आज कल हर बात के लिए कोई न कोई दिवस मनाया जाता है! मित्रता दिवस पूर्व की तरह इस बार भी पूरे जोर शोर से मनाया गया! सभी जानते हैं कि सच्चा मित्र बड़े भाग्य से ही सुलभ हो पाता है! रामचरित मानस में भी गोस्वामी तुलसी दास जी ने सच्चे मित्र की पहचान के लिए जो कुछ लिखा है उसका भावार्थ यह है कि अपने पहाड़ से दुख को एक धूल के कण के समान और मित्र के रज कण समान दुख को पर्वत के समान समझना चाहिए!(वर्तमान में ठीक इसके विपरीत हो रहा है यह एक विचारणीय प्रश्न है) मित्र की यथाशक्ति मदद कर सकते हैं तो अवश्य करनी चाहिए और जब दोस्त विपत्ति में हो तो उसे पूर्व से सौ गुना स्नेह करना चाहिए!और एक सच्चा मित्र वही है अथवा हो सकता है जो अपने मित्र को कुमार्ग(गलत) पर जाने से रोके और सुमार्ग पर ले चले!और आज तो "प्रेमी ही अपनी प्रेमिकाओं की हत्या तक करने में जरा सा भी नहीं चूकते!" जबकि संबंधों की शुरुआत मित्रता से ही शुरू हो पाती है! जो मित्र बनने लायक भी नहीं है वह क्या जीवन साथी बन सकते हैं? आज आधुनिक पीढ़ी को चाहिए कि प्राचीन ग्रंथों की अच्छी बातों को ग्रहण करे और जो प्रसंग अच्छा रास्ता दिखाते हों उन्हें मन से स्वीकार किया जाए, इसमें कोई हर्ज नहीं है!   

मेरे सच्चा मित्रो की पोस्ट पर  जाए. 
इस ब्लॉग की 100 वीं पोस्ट पेश करते हुए मुझे खुशी और हर्ष हो रहा है! 
सवाई सिंह राजपुरोहित  AAJ KA AGRA
                          और 
  सोनू जी का ब्लॉग SMS HINDI