महिला दिवस की सार्थकता समग्र रूप से हमारे देश में आज भी कानून तो हैं, पर उनका पालन नहीं है। आज भी नारी शोषित तबके की ही है। ऐसा हाल तब है जब देश की सर्वोच्च सत्ता महिला, सबसे बड़ी पार्टी की अध्यक्ष महिला, सबसे बड़े प्रदेश की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। हर कोई कुछ न कुछ कहीं न कहीं दोषी है। अगर हमें इसे दूर करना है तो सोच बदलनी होगी। तभी महिला दिवस की सार्थकता साबित होगी।